शुक्रीया
शुक्रीया , आभार , मेहरबानी , थेंक्स यह कुछ ऐसे शब्द हैं जो प्रायः सुने जाते हैं , हम सभी इन शब्दों का दिन में कम से कम एक बार तो प्रयोग अवश्य करते हैं , करना भी चाहिये क्योंकि यह हमारे संस्कारों में भी शामिल है और हमें बचपन से यह सिखाया भी जाता है कि गर कोई हमारी मदद करे तो उसको शुक्रीया जरूर कहना चाहिये , बहुत बार यह भी सुना जाता है कि अपनों में शुक्रीया कैसा ! मगर यह सिर्फ बोलने की बात है दरअसल यह लफ्ज़ सुनकर सामने वाले को भी आत्मिक संतोष मिलता है
क्या आप जानते हैं कि कई बार यह छोटा सा शब्द भी बहुत कमाल कर जाता है कि मगर कभी इसके महत्व पर ध्यान ही नहीं दिया जाता
प्रायः होता यह है कि गर कोई हमारा बडा काम कर देता है , तब हम जरूर उसका आभार प्रकट करते हैं मगर जब छोटी सी बात हो ,तब चुप रह जाते हैं यह सोचकर कि इतनी सी बात के लिये क्या शुक्रीया कहना
मगर दोस्तों क्या आप यह जानते हैं आपका छोटे कामों के लिए बोला गया यह छोटा सा शब्द बहुत असर दिखाता है , सामने वाले के चेहरे पर मुस्कान ला देता है , अब आप सोचेंगे कि छोटी बातें मतलब ! तो आईये हम आपको बताते हैं वो कौन सी छोटी बातें हैं जिन्हें हम अकसर दरकिनार कर देते हैं
आपके पास कचरा लेने वाला आता है आप उसे घर का कचरा तो दे देते हैं मगर कभी उसको शुक्रीया नहीं कहते , उसे थेंक्स कहें
आप कहीं रिक्शा से जा रहे हैं तब अपनी मंजिल पर पहुंच कर उसे भी पैसे देते समय थेंक्स कहें
आपकी महरी या दफ्तर का कर्मचारी जब आपके लिये अतिरिक्त काम करता है तब उसे भी थेंक्स कहें
जब आप अपने बच्चों से कोई भी छोटा काम कहते हैं उसके करने पर उसे भी थेंक्स कहें
इसी तरह आपकी छोटी से छोटी मदद करने वाले को थेंक्स कहें
अब आप सोच रहे होंगे कचरा लेने वाले को , रिक्शा वाले को , कर्मचारी को या बच्चों को थेंक्स क्यूं कहे ? वह या तो उनका काम है या फिर हम उस काम के लिए उनको तन्खवा दी जाती है ,
यह सही है कि आप हर काम की कीमत चुका देते हैं , मगर ज़रा यह सोचें कि अगर वह कचरा लेने वाला न आता तब क्या होता !
आप कहीं जा रहे हैं और आपको रिक्शा या टेक्सी न मिलती तो तब या तो आप जाते ही नहीं या फिर अपनी गाडी न होने पर पैदल जाना पड़ता
इस तरह छोटी बातों पर थेंक्स कहने से आप छोटे नहीं होंगे मगर आप जब उन्हें थेंक्स कहेंगे तब उनके चेहरे पर जो मुस्कान होगी उसका कोई मोल नहीं और सामने वाला दूसरी बार दिल से आपकी मदद करने को तैयार होगा
चलिये यह भी मान लिया कि आपको इन सब को सामने से शुक्रीया कहना ठीक नहीं लगता कि कहीं वह लोग हमें पागल न समझें मगर तब भी आप मन में तो आभार प्रकट कर ही सकते हैं , वैसे भी भावनाएँ telepathy के जरिये सामने वाले तक पहुंच ही जाती हैं
वैसे भी यह दुनियां गोल है हम जो भी इसे देंगे वह हमारे पास वापस लौट आता ही है तो अगर हम किसी को अच्छाई या मुस्कान देंगे तो कभी न कभी हमारे पास भी लौट आएगी ।
प्रिया वच्छानी
शनिवार, 7 फ़रवरी 2015
शुक्रीया
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