अक्सर स्त्रियों को पसंद होती है चाय
दिख जाते है उनके हाथ में कप
घर आने वालों से जरूर पूछती.. चाय
चाय लगती उन्हें अपनी सी
सपनों का जला चूल्हा
संस्कारों की पत्ती
वाणी की मिठास
आत्मसमान की अदरक
देह सी कुटी इलाइची
ससुराल नामक दूध में घुल
भुला देती अपना अस्तित्व
शायद इसलिए ही
जब तब दिख जाती हैं औरतें
हाथ में लिए गर्मागर्म चाय का कप
शायद उड़ती भाप संग
फूंक से उड़ाती अपनी आहें।
#priyavachhani
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