बुधवार, 12 अगस्त 2015

अब तुम बड़े हो गए

वो हंसी वो कहकहे वो मुस्कुराहटें

सब के सब ना जाने कहां खो गए

रह गईं बस उदासी परेशानियां

लोग कहते हैं अब तुम बड़े हो गए

बीत गए  मस्ती भरे वो प्यारे से दिन

वो खेल, वो खिलोने, वो पलछिन

वो बनकर अब इक दास्तां रह गए

लोग कहते हैं अब तुम बड़े हो गए

कागज़ की नाव बारिश में चलाना

न धूप का पता न छाँव का लगना

आज वो नज़ारे जाने कहाँ खो गए

लोग कहते हैं अब तुम बड़े हो गए

दोस्तों का रूठना , रूठकर मानना

अपनी बात की धौंस जमाना

अब वो लम्हे कहाँ सो गए

लोग कहते है अब तुम बड़े हो गए

चश्मा चढ़ा दादी की नक़ल उतारना

पापा की छोड़ी सिगरेट को फुंफकारना

अल्हड़पन की मस्ती में फ़ना हो गए

लोग कहते हैं अब तुम बड़े हो गए

छोटे भाई बहनो के लिए लड़ना

अपनी गलती दूसरों पर मढ़ना

गुस्से में घर से अब हम दूर हो गए

लोग कहते हैं अब तुम बड़े हो गए

वो कंचो के निशानों पर आँखे मोड़ना

जीत जाने पर अपनी अकड़ को जोड़ना

वो अहसास अब न जाने कहाँ खो गए

लोग कहते हैं अब तुम बड़े हो गए

वो मासूम बचपन की कहानियां

थोड़ी नादानियां थोड़ी शैतानियां,

दिन वो प्यारे ये आए और वो गए

लोग कहते है अब तुम बड़े हो गए

साथ जाते हम स्कूल मीत चार

याद आता कितना खास प्यार

सिर्फ अब वो कहानी किस्से हो गए

लोग कहते है कि अब तुम बड़े हो गए

प्यारे दोस्तों का हरपल साथ था

गम में भी ख़ुशी का अहसास था

वो निश्छल दोस्ती के ज़माने खो गए

लोग कहते हैं अब तुम बड़े हो गए

टीफिन में तो भरा प्यार अपार था

मस्ती का ही होता बस खुमार था

वो दिन कहाँ रफू चक्कर हो गए

लोग कहते है अब तुम बड़े हो गए

सोते के कान में चुपचाप रुई घुमाना

भैया बहन की पुस्तक को छुपाना

अब तो ऐसा करने से मन घबराए

लोग कहते है अब तुम बड़े हो गए

खेल खेल में यहाँ वहां छिप जाना

लड़ने के बाद साथ बैठ फिर खाना

दोस्त बहुत पर अब अपना किसे 

लोग कहते है अब तुम बड़े हो गए

दूर हो गए मासूमियत के साये

अल्हड़पन,अबोध वो अठखेलियाँ

वो बेफिक्री के दिन कहीं खो गए

लोग कहते हैं अब तुम बड़े हो गए

बात बात पर निस्वार्थ मुस्कुराना

वो नए वस्त्र पहनकर इठलाना

दोस्तों संग शैतानियों के दिन खो गए

लोग कहते हैं अब तुम बड़े हो गए

जाम तोड़ते  कभी आम पेड़ चढ़ते

छोटी छोटी बात पर थे बहुत लड़ते

वो दिन न जाने कहाँ अब लद गए

लोग कहते है अब तुम बड़े हो गए

वो प्यार हुआ था जो पहली नज़र में

वो रिश्ते बने थे जो बाली उमर में

वक्त के दरिया में वो कहां बह गए

लोग कहते हैं अब तुम बड़े हो गए

वो रातभर सितारों संग जागना

चाँद से महबूब की बाते करना

वो तारे अब ना जाने कहां सो गए

लोग कहते हैं अब तुम बड़े हो गए

चलती क्लास में घूमने का प्रोग्राम बनाना

बहार निकाले जाने पर दोस्तों को बुलाना

वो फिल्मों के शौक न जाने कहां खो गए

लोग कहते हैं अब तुम बड़े हो गए

कॉफी के बहाने दोस्तों संग वक्त बिताते

बेबात की बातो पर ठहाके लगाते

वो हसी वो ठहाके कब गुमनाम हो गए

लोग कहते हैं अब तुम बड़े हो गए

देखे थे कभी कुछ रंगीन से सपने

न जाने अब कहां खो गए वो अपने

सपनो की माला को संजोते रह गए

था जब बचपना सभी से शरमाते थे

ठीक से भी ना हम चल पाते थे

हौसलो ने दी जब ताकत खड़े हो गए

लोग कहते है अब तुम बड़े हो गए

कैसा वो दिलकश रूमानी समां था

उधर तुम हसीं थे इधर दिल जवां था

महल थे जो सपनों के सब ढह गए

लोग कहते हैं अब तुम बड़े हो गए

छज्जे में खड़े होकर तुम बुलाते थे

मुझको न जाने कितना लुभाते थे

न रहे वो बुलावे अब वो कहीं खो गए

लोग कहते है अब तुम बड़े हो गए

वो जो नरम नाजुक से अहसास थे

संग जीने मरने के जो वादे खास थे

वक्त की आंधियो में कहीं खो गए

लोग कहते है अब तुम बड़े हो गए

दूसरों के लिए अब वक्त गवांते है

अब ना होली ना दीवाली मनाते है

सपने दिल के दिल में ही सो गए

लोग कहते हैं अब तुम बड़े हो गए

बालों में अब सफेदी झलकने लगी

रेत  मुट्ठी  से  जैसे  सरकने  लगी

लौट कर आए कब लम्हे जो गए

लोग कहते हैं अब तुम बड़े हो गए

कोई सुनता नहीं अब अपनी बातें

आँखों ही आँखों में कटती है रातें

अपने बच्चे ही अब बेगानेे जैसे हो गए

लोग कहते हैं अब तुम बड़े हो गए।

भरत , प्रिया , एकता , मधुर , दिनेश

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें