शुक्रवार, 22 मई 2015

बेटियां


                               बेटियां

पिछले कई दिनों से एक कविता हर जगह पढने मिल रही है| “बेटियां मायके कुछ लेने नहीं आती, बेटीया मायके आती है.......|” बहुत सुंदर रचना है और सत्य भी| बेटीया मायके से कुछ लेने नहीं आती उन्हें तो बस प्यार और अपनापन चाहिए| किन्तु इसे पढ़कर बार-बार मेरे मन में एक ख़याल आ रहा है| जिससे कुछ लोग सहमत होगे तो शायद कुछ लोग इत्तेफाक भी रखेंगे| पर कहीं न कहीं यह एक कटु सत्य भी है|

हर बेटी मायके जाना चाहती है| वहा जा कर उसे जो माँ-बाप से भाई-बहनों से लाड प्यार मिलता है उससे वह फूली नहीं समाती| अपनी मसरूफियत भरी ज़िन्दगी से कुछ पल चुराकर वह फिर से बचपन की यादों को ताज़ा करना चाहती है| मायका चाहे पास हो या दूर, शहर में हो या परदेश में, हर औरत के मन में मायके जाने की ललक रहती है| किन्तु हम में से कितनी ऐसी औरते है जो जितना खुद मायके जाने पर खुश होती है उतना ही खुश वो ननद के आने पर भी होती है? और कितनी औरते है जिनको ये कहते नहीं पाया जाता कि ‘जब भी मायके जाओ भाभी की तो त्योरियां चढ़ी रहती हैं|

यही संसार है और शायद यही चलन भी| कि मायके तो हम सब जाना चाहती है पर ननद के मायके आने पर खुश नहीं होती| लेकिन ऐसा क्यों होता है आइये इन बातो पर जरा गौर करते है|

जब भी ननद के मायके आने की बात होती है भाभी के मन में एक हलचल सी शुरू हो जाती है| क्योंकि ननद के आने पर भाभी चाहे जितनी भी कोशिश कर ले सास उसके काम में कोई न कोई गलती निकलती रहती है| और उसपर ननद का कटाक्ष करना या फिर अपनी बढाई करना भाभी के मन में एक कुंठा उत्पन्न करता है| जिससे रिश्ते में दूरिया बढ़ती जाती हैं| भाभी को ननद की सेवा और खातिरदारी तो करनी ही है किंतु इन सब बातो के चलते वो मन से कोई काम नहीं कर पाती| फिर इसपर आग में घी का काम करता है यह की लडकिया जब भी मायके जाती है तो वह माँ-पापा, भाई-बहनों यहाँ तक कि बच्चों के लिए भी कुछ न कुछ तोहफ़े लेकर जाती हैं| पर वहीं वह या तो भाभी को भूल जाती हैं या फिर बाकी लोगो को दिए गए तोहफ़ो से कम होता है| जिससे ये एक और वजह बन जाती है दूरियों की|

वही भाभी भी ननद के आने से पहले ही मन में यह धारणा बना लेती है| कि अब घर का काम तो बढेगा ही साथ ही सास ननद के ताने भी सुनने पड़ेगे| इस धारणा के चलते उसे छोटी-छोटी बाते भी ताने लगने लगती हैं| इसपर अगर ननद माँ से कुछ इच्छा भी जाहिर कर दे तो भाभी की त्योरिया चढ़ जाती है कि मेरे पति को को ही खर्च वहन करना पड़ेगा|

सखियों कुछ ऐसी ही छोटी-छोटी बाते है जिसपर अगर हम सब गौर करे तो और अपना ले तो ननद भाभी से ज्यादा प्यारा रिश्ता कोई और न होगा|

जैसे भाभी ननद के आने से पहले से ही अपने मन में कोई भ्रान्ति न पाले| थोडा अगर सास या ननद कुछ कहे भी तो यह सोचे की क्या कभी हमारी माँ या बहन से कहासुनी नहीं होती? यह सोचकर बात को वहीं रफा दफा करे उसकी कडवी याद न बनाये|

ननद के कुछ मनुहार करने पर या माँ भाई से कुछ मांगने पर नाक मुह न चढ़ाये| बल्कि यह सोचे कि जैसे मै अपने मायके में अधिकार जमाती हूं वैसे ही मेरी ननद का भी यह मायका है| उसका भी अपने भाई पर हक़ है| और जितनी ख़ुशी और गर्व मुझे होता है अपने माँ भाई पर उतना ननद को भी तो होगा|  

ननद तो कुछ दिनों के लिए ही आती है खातिरदारी तो करनी ही है| फिर चाहे मुह चढ़ा कर की जाए या ख़ुशी से की जाए| पर हां अगर ख़ुशी से करेंगी तो ननद भी विदाई लेते समय नम आँखों से आप का शुक्रिया अदा किये बिना न जा पायेगी| और वैसे भी बेटियों की आदत होती है ससुराल में मायके के बारे में बढ़ा चढ़ा कर बताना| तब वो आप की तारीफ़ किये बिना भी न रह पायेगी|

वहीं ननद को भी कुछ बातो का ध्यान रखना चाहिए| आप भले ही मायके में मेहमान हैं| पर भाभी का काम में थोडा हाथ बटायेगी तो उन्हें भी अच्छा लगेगा|

भाभी के सामने कभी अपनी बढाई न करे| और न ही छोटी बातो पर कटाक्ष| वह भी इंसान है कोई मशीन नहीं गलती हो जाती है कभी-कभी उसको नजरअंदाज़ करे|

अगर आपकी भाभी से कहासुनी हो जाए कभी तो उस बात को वहीं ख़तम करे |बात का बतंगड़ न बनाये| और आपके सामने गर माँ से किसी बात पर भाभी की बहस हो तो उनपर कटाक्ष न करे बल्कि दोनों को प्यार से समझाकर सुलह करवा ले|

लाड में माँ या भाई से कुछ ऐसा न मांग लें कि भाई पर अतिरिक्त बोझ पड़े| वैसे भी कोई भी माँ या भाई अपनी बहन को यथाशक्ति देने का भरसक प्रयत्न करते ही है| और फिर रिश्ते तोहफों से नहीं प्यार से फलते फूलते है|

ऐसी ही कुछ छोटी-छोटी बातो पर ध्यान देने से संबंधो की डोर और मजबूत होगी|
प्रिया व्च्छानी

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