गुरुवार, 11 जून 2015

गद्दारों को औकात दिखलायेंगे

अब आया है अपना वक्त
अब कुछ कर दिखलायेंगे
देश के गद्दारों को अब
उनकी औकात दिखलायेंगे
कैसे होते है देशभक्त
कैसा होता है छप्पन इंच
के सीने का दम
अब वो समझ जाएंगे
देश के गद्दारों को अब
उनकी औकात दिखलायेंगे

गूंगे के हाथों से
अब तक देश चलता रहा
विदेशी के इशारों पर वो
कठपुतली बन नाचता रहा
वीरों के हाथों को जकड़ लिया था
उसने विदेशी जंजीरो से
मगर वीरों के हाथ हैं आज़ाद अब
अब उनकी नानी याद कराएँगे
देश के गद्दारों को अब
उनकी औकात दिखलायेंगे

अब शेर के हाथों में
देश की कमान आई है
खत्म होगा यह आंतकवाद
यह आशा उसने जगाई है
देश के वीर अब चुप न रहेगें
जो करेगा वार खायेगा वो मुंह की
यह अब कर के दिखलायेंगे
देश के गद्दारों को अब
उनकी औकात दिखलायेंगे

अब तक जो न हुआ कभी
वो आज देश के वीरो ने
कर के दिखलाया है
खुले हाथ जब उनके
अपना बदला चुकाया है
घर में घुस कर उन हत्यारो को
अब वो ऐसे ही सबक सिखलायेगे
देश के गद्दारों को अब
उनकी औकात दिखलायेंगे

अब न सहन होगा आंतकवाद
इसका छोटा सा सबूत दिखाया है
गर अब आँख भी उठाई तो
तो पूरा चलचित्र दिखा देंगे
इतने में ही तुम अपने कपडे भिगो बैठे
सोचो जब आये हमारे सैनिक
तो क्या तुम्हारा हाल कर जायेंगे
देश के गद्दारों को अब
उनकी औकात दिखलायेगे ।
प्रिया

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