खामोशियों को चीरते हुए
अब इक चीख
निकलनी चाहिये
बहुत हुआ भ्रष्टाचार
अब यह आवाज़
निकलनी चाहिये
क्यों करे किसी
मसीहा का इंतज़ार हम
क्यों न कदम बढाकर
आगे आएं आज हम
बहुत हो चुका
ज़ुल्म और सितम
अब हर इंसान में
इस के खिलाफ एक
आग जलनी चाहिये
बहुत हुआ भ्रष्टाचार
अब यह आवाज़
निकलनी चाहिये
हटाओ उन नेताओं को
कुर्सियों से जिन्हें
भ्रष्टाचार का दीमक लगा है
हटाओ उन अफसरों को
जिन्होंने रिश्वत को माँ समझा है
मारी है गरीबो के
पेट पर लात जिन्होंने
अब उनकी जूते पहना
बारात निकालनी चाहिए
बहुत हुआ भ्रष्ट्राचार
अब यह आवाज़
निकलनी चाहिये
भ्रष्टाचार कर जो
भारत माँ की
कोख लजाते हैं
पीकर खून गरीबों का
जो अपने महल बनाते हैं
घोटालों पर घोटाले कर
खुद को पाक साफ़ बताते हैं
ऐसे देशद्रोहियों को
अब उनकी औकात
दिखानी चाहिये
बहुत हुआ भ्रष्टाचार
अब यह आवाज़
निकलनी चाहिये ।
---------------प्रिया
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