गुरुवार, 11 जून 2015

याद

जाने क्यों आज 
यादो ने तुम्हारी 
दिल में दस्तक दी है 
जाने क्यों आज भी
मेरी आँखों से 
शबनम छलकती है 
मगर आज एक सच 
जरा मुझसे कहना तुम 
पूछू सवाल जो तुमसे 
तो चुप न रहना तुम 
अब भी क्या 
दिल तुम्हारा 
मेरे नाम से 
धड़कता है !!
अब भी क्या 
ख्वाबो में तुम्हे 
चेहरा मेरा दिखता है!! 
अब भी क्या 
यादो में मेरी 
तुम सारी रात 
जागते हो !!
अब भी क्या 
दुआओ में तुम 
मुझे हरदम मांगते हो !!
मैंने तो अब तक 
तेरे दिए फूल 
सहेजकर रखे है 
डाईरी के पन्नों में 
मैंने अब तक 
तेरी यादो को 
समेटकर रखा है 
दिल के कोनो में 
आज भी छूती है 
जब ठंडी हवा तो 
लगता लायी है 
पैगाम तुम्हारा 
आज भी दुआओ में 
लब तक आ जाता है 
नाम तुम्हारा ।

प्रिया वच्छानी

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