बुधवार, 17 अप्रैल 2019

पापा की बेटी

"Pls भाई साहब मुझे सिर्फ़ दो मिनट के लिए अंदर जाने दे "
"नहीं मैडम , आप समझिये हम आपरेशन थियेटर में ऐसे किसी को जाने नहीं दे सकते "
"आप समझने की कोशिश करीये ,मेरे पापा को अभी अंदर ले कर गये हैं , अभी वो बेहोश नहीं हुए होंगे मैं बस दो मिनट उन्हें देख आऊं "
"नहीं मैडम आप नहीं जा सकती अंदर "
इतने में आवाजें सुनकर डाक्टर आये " क्या बात है ? क्या शोर है ये ? "
"डाक्टर साहब आज मेरे पापा की सर्जरी है , आपने सुबह नौ बजे का समय दिया था आपरेशन का मगर अभी साढे आठ ही बजे हैं "
"हां तो ?" डाक्टर हैरानी से बोला
डाक्टर साहब मैं यहां से दूर रहती हूं , सुबह पांच बजे से घर से निकली हूं ताकि आठ बजे तक पहुंच जाऊँ और  पापा के साथ कुछ वक्त बिताने का मौका मिलेगा ,मगर जैसे ही मैं आयी तो पता चला आप लोग मेरे पापा को अभी अंदर ले गये हैं "
"आप चाहती क्या हैं ?"
"मैं सिर्फ़ अपने पापा से दो मिनट मिलना चाहती हूं , दिखाना चाहती हूं कि मैं पहुंच गयी हूं ताकि उनको भी संबल मिले कि उनकी बेटी बाहर उनका इंतजार कर रही है ...pls डाक्टर साहब pls " आँखों में पानी लिए हुए लगभग गिडगिडाने के अंदाज में कहा
" मगर आप ऐसे अंदर नहीं जा सकती "
"pls डा. साहब pls बस एक मिनट के लिए "
फिर कुछ सोचते हुए डाक्टर अपना हरा कोट , हरी टोपी और चप्पल उतारकर
" यह पहन लो और जाओ बाये हाथ की तरफ दूसरे नं के बेड पर हैं आप के पापा , लेकिन सिर्फ़ दो मिनट "
"thank u , thank u soo much डा. साहब " और जल्दी वह कोट पहन कर मैं पहुंच गयी आपरेशन थियेटर में
"अरे ! तुम अंदर कैसे आ गयी ?" पापा ने हैरानी से पूछा
"आखिर आपकी बेटी हूं पापा कौन रोक सकता है मुझे आपसे मिलने से " style मारते हुए कहा मैंने
फिर न पापा ने कुछ कहा न ही मैंने बस दोनों मुस्कराये , उस समय पापा की आँखों में एक सुकून सा नज़र आया , और पापा की सर्जरी कामयाब भी हुई ,
आज शुक्रीया कहना चाहती हूं उस डाक्टर को जिसने एक बेटी और बाप की भावनाओं को समझा । Thankx

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