शुक्रवार, 5 अप्रैल 2019

नवजात बच्ची की व्यथा

मुझे अपने गले से लगा लो न माँ
डर लगता है इस जालिम दुनिया से
मुझे अपने आँचल में छुपा लो न माँ

न जाने क्यू लोग बेटियो को
कोख में ही मार देते है
बेटा पाने की चाह में
बेटियो की जान वार देते है
तुम मेरे साथ ऐसा न होने दोगी न माँ
डर लगता है इस जालिम दुनिया से
मुझे अपने आँचल में छुपा लो न माँ

इक बार जन्म लेने की कोशिश की थी मैंने
अभी बस माँ की कोख ही देखी थी मैंने
फिर इक दिन न जाने कैसी हलचल हुई
देख अपने आस-पास हथियारों को
मेरे दिल में कंपन हुई
चुभा था मुझे जब वो हथियार
जोर से की थी मैंने चीख पुकार
माँ बचा लो मुझे कहते हुए
मैं बहुत चिल्लायी थी
पर शायद मेरी चीख माँ
के कानो तक पहुँच न पाई थी
दर्द अपनी हद से पार हुआ था तब
अस्पताल के पीछे 
कुत्तो और चील कौवों ने 
मेरी बोटी बोटी को नोचा था जब
अब फिर यह अत्याचार
मुझ पर न होने दोगी न माँ
डर लगता है इस जालिम दुनिया से
मुझे अपने आँचल में छुपा लो न माँ

फिर एक बार मैं इस दुनिया में आई थी
अभी आँख मेरी खुलने भी न पाई थी
बाऊजी ने दूध के बर्तन में
मेरे होठो को सिया था
बड़ी घुटन हुई थी मुझे तब
जब कानो और नाक से
मैंने वो दूध पिया था
जिस दूध को पी मैं बड़ी होती तब
उसी दूध से मेरी मौत हुई थी जब्त
तुम तो अब मेरे साथ फिर ऐसा
न होने दोगी न माँ
डर लगता है इस जालिम दुनिया से
मुझे अपने आँचल में छुपा लो न माँ।

प्रिया वच्छानी

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