पिछले एक दशक से देश भर में शादियां टूटने की घटनाओ में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है। कई लोग इसका जिम्मेदार शिक्षित और कामकाजी महिलाओं को मान रहे हैं। सामाजिक व् नैतिक मूल्यों में आये बदलाव की वजह से महिलाओं की सोच बदली हैं। अब वह पहले से कहीं अधिक अपने अधिकारों को लेकर सजग हुई हैं। वह किसी भी तरह के अन्याय को अब बर्दाश्त नहीं कर रही। किन्तु अब तो कई जगह इसका जिम्मेदार इंटरनेट को भी माना जा रहा है, जो के काफी हद तक सही भी है।
जहाँ एक तरफ इंटरनेट की वजह से समाज ने प्रगति की है। वहीँ दूसरी तरफ नैतिक पतन भी हो रहा है। सबसे ज्यादा दुःख की बात यह है के सब जानते हुए भी कई लोग एक दूसरे की देखा-देखी अंधी खाई में गिरते जा रहे हैं। पहले अगर जीवनसाथी में या उसके स्वभाव में कोई कमी होती तो प्यार और धैर्य से उसे दूर करने की कोशिश की जाती। किन्तु आज के जमाने में लोगो की सोच बदल गयी है वो बजाय धैर्य से काम लेने के सहजता से दूसरे साथी की तलाश शुरू कर देते हैं। यही नहीं चाहे जीवन साथी में कोई कमी न भी हो किन्तु आज सोशल नेटवर्किंग साईट लोगों के घर टूटने की वजह भी बन रहे हैं। लोग पहले मजाक में यह सब शुरू करते हैं फिर धीर-धीर कब यह अलगाव का कारण बन जाता है यह पता भी नहीं चल पाता। वैसे भी इंसानी फितरत ही होती है जो चीज पास हो उसकी कोई कद्र नहीं होती और जो चीज दूर हो उसे पाने की ललक रहती है। यह कहावत सोशल नेटवर्किंग साईट पर बिलकुल सच साबित होती दिख रही है।
आज के समय में केवल पुरुष ही नहीं महिलाये भी अवैध सम्बन्ध बनाने में पीछे नहीं रहती।
किन्तु पुरुष हो या महिला ऐसा क्यों हो रहा है?
क्यों जीवन साथी होते हुए भी लोग बाहर ख़ुशी और प्यार ढूंढते हैं?
जाहिर है इसकी वजह कोई एक व्यक्ति नहीं हो सकता। क्योंकि एक हाथ से ताली नहीं बजती। यह जरुरी नहीं घर टूटने की कोई बड़ी वजहें हों कई बार छोटी अँदेखियां भी इसका कारण बनती हैं। वह कौन सी छोटी वजहें हैं आइये कुछ इस बारे में जानते हैं।
शुरुवात महिलाओं से करते हैं। कई महिलायें जब बाहर जाती हैं तब तो काफी सज-संवर कर जाती हैं किन्तु घर में वो अपने श्रृंगार का बिलकुल ध्यान नहीं रखती। बेतरबी से बंधे बाल, सिलवट भरे कपडे देखकर ऐसा लगता है मनो अभी नींद से उठी हैं। कभी कोई टोक भी दे तो ये जवाब आता है" घर में ही बैठी हूँ बाहर नहीं जा रही जो तैयार होकर बैठूं , वैसे भी अब तो शादी हो गयी अब क्या सजना"। ऐसा सोचना बिलकुल गलत है। पुरुष वर्ग हमेशा से ही सुंदरता की तरफ ज्यादा आकर्षित होते हैं। वो जब काम से थके वापस आये और सामने मुस्कुराकर सजी हुई पत्नी जब स्वागत करती है तो आधी थकान यूँ ही मिट जाती है। इसलिए सिर्फ बाहर ही नहीं घर पर भी तरतीब से रहें।
कई महिलायें पति की कही बातों पर ध्यान ही नहीं देती। जैसे उन्हें क्या पसंद है! क्या नहीं इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता वो वही करती हैं जो उन्हें पसंद हो। जो की गलत है हमेशा अपनी बात को ही नहीं पति की बात को उनकी पसंद नापसन्द को भी महत्तव देना चाहिए।
कई महिलाये शाम को पतिदेव के वापस आते ही दिन भर की अपनी रामायण सुनाने बैठ जाती हैं। आज मायके में ये हुआ, सास ने ननद ने ऐसा किया। अरे भई! दिन भर का थका आदमी घर आया है उसे प्यार से पानी, चाय दो पहले फिर आराम से कुछ उसकी सुनना, कुछ अपनी सुनाना।
इसी तरह पुरुष वर्ग को भी कुछ बातों का विशेष ध्यान देना चाहिए
ज्यादातर पुरुषों की ये प्रवृति होती है की वह दूसरी औरतों की तारीफ़ तो बहुत जल्दी कर देते हैं वही अपनी पत्नी की खूबियों को उपेक्षित कर देते हैं। एक बात सदैव याद रखिये स्त्रियां सिर्फ प्यार और तारीफ़ की ही भूखी रहती हैं और कभी-कभी इसी का फायदा पर पुरुष उठाते हैं
पुरषों की आदत होती है ज़रा सी बात पर वो पत्नी के मायके वालों पर ताने कसते हैं। जो की गलत हैं कोई भी लड़की अपने लिए चार बाते सुन भी लेगी किन्तु अपने मायके वालो के लिए नहीं सुन पाती और यह बातें झगड़े का कारण बन जाती हैं।
एक लड़की अपने रिश्ते-नाते, सहेलियां, घर यहाँ तक की अपना नाम और उपनाम भी छोड़कर नए रिश्ते, नया नाम अपनाती है उसके बदले वो और कुछ नहीं बस थोड़ी सी कदर, थोड़े प्यार और अपनेपन की अपेक्षा तो रख ही सकती है आपसे।
कुछ ऐसी ही छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देने से रिश्ते न सिर्फ टूटने से बचेंगे बल्कि और मजबूत भी होंगे।
प्रिया वच्छानी
सोमवार, 7 दिसंबर 2015
क्यों दरकते हैं रिश्ते
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